Sunday, July 20, 2008

चिंतन-मनन Contemplation

मूढ़मति इंसान धन संपत्ति जोड़ने में जीवन खपा डालता है। संचय करने की प्रवृत्ति उसे अशांत बनाए रखती है। मनुष्य पदार्थों की चिंता करता है, लेकिन पदार्थों को देने वाले का चिंतन नहीं करता। जिस दिन वह चिंता की जगह परमात्मा का चिंतन शुरू कर देगा, उसका सहज ही कल्याण हो जाएगा। - आदि शंकराचार्य

A fool wants his life in accumulating wealth. The instinct of accumulation makes him un-peaceful. Man cares for matter but ignores the providence. The day he starts contemplation on God in place of worries, he will easily attain benediction. - Aadi Shankaracharya

हम अपने बारे में जो दृढ़ चिंतन करते हैं, जिन विचारों में संलग्न रहते हैं, क्रमशः वैसे ही बनते जाते हैं। -सुभाषित

आत्मा का अपने साथ बातचीत करना ही मनन है। -प्लेटो

बिना मनन किए पढ़ना, बिना पचाए खाने के सामान है। -वर्क

जिसमें सोचने की शक्ति ख़त्म हो चुकी है, समझ लीजिये वह व्यक्ति बरबाद हो चुका है। -सुकरात


 जैसा सोचोगे वैसा बनोगे. 

2 comments:

Udan Tashtari said...

हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है. नियमित लेखन के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाऐं.

वर्ड वेरिपिकेशन हटा लें तो टिप्पणी करने में सुविधा होगी. बस एक निवेदन है.

छत्तीसगढिया .. Sanjeeva Tiwari said...

स्वागत